मौलाना रूम मतनवी एक हकायत बताते हैं, एक सपईरा सांप पकड़कर अपनी रोटी रोज़ी का सामान करता था. दिन रात नए ाोरज़हरिले सांपों की तलाश में जंगलों ोईरानों ाोरसहराउं में जुट रहता.
एक बार बर्फबारी के मौसम में यह एक शक्तिशाली ालजतह अजगर मृत हालत में दिखाई दया.सपेरे इतना बड़ा अजगर पहले कभी नहीं देखा था, उसके देखने से उसके दिल पर हीबत छाई, फिर ख्याल आया कि अगर उसे किसी तरह उठाकर शहर ले जाऊँ तो तमाशियाईों का ानबवह प्रभाव जमा हो जाएगा और मेरी आमदनी में लगभग से लगभग वृद्धि हो जाएगा.
सो! वह बड़ी मेहनत और परिश्रम से मृत अजगर को लेकर शहर में आ गया, अजगर था, एक लंबे खंभे लग रहा था. सपईरा उसे मोटे रसों से बांध करखेनचता हुआ लाया और शहर में प्रचार करवा दी मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी जान को ाज़अहद जोखिम में डालकर इस अजगर को काबू किया, लेकिन अफसोस कि यहां तक पहुंचते पहुंचते यह मर गया है.
सपेरे के इस कारनामे से शहर बगदाद में धूम मच गई, लोग जूक दरजूक वहां पहुंचने लगे, सैकड़ों और हजारों मूर्ख जमा हो गए.
सपेरे ने उनसे पैसे बटोरने के लिए यह व्यवस्था भी है कि अजगर को लपेट लपाट एक बड़े से टोकरे में बंद कर दिया ताकि जब अधिकतम लोग जमा हो तब अजगर के विमोचन किया, थोड़ी ही देर में इतना लोग जमा हो गए कि शहर के चौक में तिल धरने की जगह बाकी नहीं रही.
दूसरी ओर वास्तविकता यह थी कि सपईरा अपने गुमान अनियमित अनुसार उसे मृत समझ रहा था जबकि वह जीवित था, तीव्रता की ठंड ाोरबरफबारी की वजह से शरीर सुन हो गया था और वह मृत दिखाई दे रहा था.
शहर धूप और लोगों ाژदहाम कारण उसके अस्तित्व में कुछ गर्मी पैदा हुई और अचानक वह एक स्ट्रोक ली और अपना मुंह खोल दिया, फिर क्या था एक घंटे उत्पन्न हो गई, लोग हड़बड़ी होकर भागे, बहुत से लोग भीड़ में बुरी तरह कुचले गए. अजगर सारे रस्से तोड़ दिए.
आतंक की वजह से सपेरे के हाथ पैर फूल गए, उसने कहा यह गजब हो गया, यह पहाड़ से किस आफत उठा लाया हूँ अंधा भीड़ में सावधान कर दिया, अपने हाथों से मौत बिलाल है,
अभी वह अपनी जगह से हिलने भी नहीं पाया था कि अजगर ने अपना गुफा सा मुंह खोलकर उसे निगल लिया, फिर क्रॉल हुआ आगे बढ़ा और एक इमारत के खंभे से अपनी आप लपेट कर ऐसा बिल खाया कि सपेरे की हड्डियां भी कोल गई हूँ होगा.
परिणाम: प्रथम प्रिय! माना कि तेरा आत्मा भी अजगर है उसे मृत मत समझ वह समय बे सामान की वजह से ठंड दिखाई.
एक बार बर्फबारी के मौसम में यह एक शक्तिशाली ालजतह अजगर मृत हालत में दिखाई दया.सपेरे इतना बड़ा अजगर पहले कभी नहीं देखा था, उसके देखने से उसके दिल पर हीबत छाई, फिर ख्याल आया कि अगर उसे किसी तरह उठाकर शहर ले जाऊँ तो तमाशियाईों का ानबवह प्रभाव जमा हो जाएगा और मेरी आमदनी में लगभग से लगभग वृद्धि हो जाएगा.
सो! वह बड़ी मेहनत और परिश्रम से मृत अजगर को लेकर शहर में आ गया, अजगर था, एक लंबे खंभे लग रहा था. सपईरा उसे मोटे रसों से बांध करखेनचता हुआ लाया और शहर में प्रचार करवा दी मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी जान को ाज़अहद जोखिम में डालकर इस अजगर को काबू किया, लेकिन अफसोस कि यहां तक पहुंचते पहुंचते यह मर गया है.
सपेरे के इस कारनामे से शहर बगदाद में धूम मच गई, लोग जूक दरजूक वहां पहुंचने लगे, सैकड़ों और हजारों मूर्ख जमा हो गए.
सपेरे ने उनसे पैसे बटोरने के लिए यह व्यवस्था भी है कि अजगर को लपेट लपाट एक बड़े से टोकरे में बंद कर दिया ताकि जब अधिकतम लोग जमा हो तब अजगर के विमोचन किया, थोड़ी ही देर में इतना लोग जमा हो गए कि शहर के चौक में तिल धरने की जगह बाकी नहीं रही.
दूसरी ओर वास्तविकता यह थी कि सपईरा अपने गुमान अनियमित अनुसार उसे मृत समझ रहा था जबकि वह जीवित था, तीव्रता की ठंड ाोरबरफबारी की वजह से शरीर सुन हो गया था और वह मृत दिखाई दे रहा था.
शहर धूप और लोगों ाژदहाम कारण उसके अस्तित्व में कुछ गर्मी पैदा हुई और अचानक वह एक स्ट्रोक ली और अपना मुंह खोल दिया, फिर क्या था एक घंटे उत्पन्न हो गई, लोग हड़बड़ी होकर भागे, बहुत से लोग भीड़ में बुरी तरह कुचले गए. अजगर सारे रस्से तोड़ दिए.
आतंक की वजह से सपेरे के हाथ पैर फूल गए, उसने कहा यह गजब हो गया, यह पहाड़ से किस आफत उठा लाया हूँ अंधा भीड़ में सावधान कर दिया, अपने हाथों से मौत बिलाल है,
अभी वह अपनी जगह से हिलने भी नहीं पाया था कि अजगर ने अपना गुफा सा मुंह खोलकर उसे निगल लिया, फिर क्रॉल हुआ आगे बढ़ा और एक इमारत के खंभे से अपनी आप लपेट कर ऐसा बिल खाया कि सपेरे की हड्डियां भी कोल गई हूँ होगा.
परिणाम: प्रथम प्रिय! माना कि तेरा आत्मा भी अजगर है उसे मृत मत समझ वह समय बे सामान की वजह से ठंड दिखाई.
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